भारत में हवाई सफर पहले की तुलना आज के समय में आसान हो गया है. आज हवाई सफर के जरिए लगभग हर बड़े छोटे-बड़े शहरों तक पहुंचा जा सकता है. आजादी के बाद देश में कई बड़े बदलाव हुए हैं जिसमें हवाई यात्रा भी एक है.
हालांकि कुछ लोगों के लिए हवाई सफर करना एक सपने की तरह ही है, क्योंकि उनके लिए ये अभी भी महंगा सौदा है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर दिन करीब तीन हजार फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं जिनसे करीब पांच लाख यात्री हवाई सफर करते हैं. घरेलू हवाई यात्रा के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है. वहीं अंतर्राष्ट्रीय हवाई मामले में हमारा देश 18वें नंबर पर है.
यात्रियों में संख्या में कितना उछाल
भारत में जैसे जैसे नए एयरपोर्ट्स बन रहे हैं वैसे ही यात्रियों की संख्या भी बढ़ रही है. आंकड़ों के अनुसार, भारत में जनवरी से मई 2023 तक एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए 6.36 करोड़ यात्रियों ने सफर किया.
ये आंकड़े पिछले साल की तुलना में 36.10 फीसदी ज्यादा है. पिछले साल इसी अवधि के दौरान यात्रियों की संख्या 4.67 करोड़ लाख रही थी. अप्रैल 2023 की तुलना में मई 2023 में यात्रियों की कुल संख्या में 3.26 लाख यानी कि 2.52 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई.
भारत तब और अब!
हवाई सेवा देश की तरक्की का एक अभिन्न अंग है. आजादी के समय हवाई सेवा देश के कुछ ही लोगों तक सीमित थी. तब भारत में महज नौ एयरलाइंस कंपनी ही थी जो एयर ट्रांसपोर्ट की सुविधा देती थी, आज 35 से ज्यादा एयर ट्रांसपोर्ट कंपनियां हैं.
2014 तक देश में 74 एयरपोर्ट थे, अब 150 से ज्यादा एयरपोर्ट हैं. सरकार की योजना अगले पांच साल में कुल 220 एयरपोर्ट बनाने की है.
भारत में सिविल एविएशन इंडस्ट्री की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान 1912 में हुई थी. तब यूनाइटेड किंगडम के इंपीरियल एयरवेज के सहयोग से पहले विमान ने दिल्ली और कराची के बीच उड़ान भरी थी.
1932 में जेआरडी टाटा ने पहले भारत एयरलाइंस टाटा एयरलाइंस की स्थापना की जिसे अब एयर इंडिया के नाम से जाना जाता है. 1990 के दशक में सरकार ने देश में प्राइवेट एयरलाइनों को संचालित करने की अनुमति दी. जिसके बाद कई प्रमुख कंपनियां जेट एयरवेज, स्पाइस जेट, विस्तारा मैदान में उतरीं.
भारत में आज भी हवाई सफर एक सपना!
पिछले कुछ सालों में हवाई यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह अनुमान है कि भारत में हवाई सफर आज भी लाखों लोगों की पहुंच से बहुत दूर है. साल 2018 में अनुमान लगाया गया था कि देश में केवल 4 से 5 फीसदी आबादी ने ही हवाई सफर किया है.
इसका मतलब है कि 95 फीसदी आबादी हवाई सफर से आज भी वंचित है. इसका कारण है-
- हवाई यात्रा अभी भी कई भारतीयों के लिए बहुत महंगी है.
- भारत में एयरपोर्ट की संख्या अभी भी कम है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.
- भारत में एयरपोर्ट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी है. जैसे कि सड़कें, रेलवे और पब्लिक व्हीकल्स.
- कुछ लोग हवाई यात्रा से डरते हैं या उसके फायदे नहीं जानते.
अपने साथ आजाद होने वाले देशों में भारत कहां!
1947 में ब्रिटिश शासन से भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद या उसी समय कई दूसरे देश भी आजाद हुए थे. एक दिन पहले 14 अगस्त को पाकिस्तान ने अपनी आजादी की घोषणा की थी. 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर एक नया देश बांग्लादेश बना था.
श्रीलंका 1948 में ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था. इंडोनेशिया को 1945 में नीदरलैंड से आजादी मिली. आइए जानते हैं अपने साथ ही आजाद होने वाले इन देशों की तुलना में भारत कहां है.
बजट: भारत के साथ आजाद होने वाले देशों के बीच हवाई सेवाओं के बजट की तुलना करें, तो भारत अपने एविएशन सेक्टर में ज्यादा निवेश करता है. इसके बाद इंडोनेशिया का बजट सबसे अधिक है, फिर पाकिस्तान (1300 करोड़) और बांग्लादेश (6597 करोड़) का बजट है.
श्रीलंका (152 करोड़), नेपाल और भूटान का बजट भारत की तुलना में बहुत कम है. भारत सरकार ने भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को 2023-24 के लिए बजट में 3113 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि 2022-23 में यह बजट 10,667 करोड़ रुपये था.
किराया: भारत में कुल एयरस्पेस 30 लाख किमी है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से ज्यादा है. वहीं भारत में लंबी दूरी के लिए एवरेज हवाई किराया 4.7 रुपये प्रति किमी है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका से कम है. हालांकि इंडोनेशिया में औसत हवाई किराया तीन रुपये प्रति किमी है.
कुल मिलाकर कहा जा सकता है भारत अपने पड़ोसी देशों से हवाई सफर मामले में सबसे आगे है. भारत का एविएशन बजट ज्यादा है, एयरस्पेस ज्यादा है और किराया भी कम है. हालांकि, कम किराये के मामले में इंडोनेशिया भारत से आगे है.
भारत सरकार को क्या कदम उठाने की जरूरत
भारत के एविएशन सेक्टर में तेजी से विकास की संभावनाएं हैं. हालांकि, भारत को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी चुनौती है- विमान में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत भारत में बहुत ज्यादा है.
इससे एयरलाइंस की लागत की बढ़ती है और यात्रियों के लिए हवाई सफर महंगा होता है. ATF की लागत कम करने के लिए सरकार को हवाई ईंधन पर लगने वाले टैक्स में कटौती करनी चाहिए या सब्सिडी देनी चाहिए.
भारत की आबादी के हिसाब से एयरपोर्ट की संख्या बहुत कम है और कुछ एयरपोर्ट की क्षमता अभी भी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. यानी कि जितनी मांग है उतनी उड़ाने नहीं है. इस वजह से फ्लाइट में देरी और कैंसिल की समस्या होती है.
एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार को नए एयरपोर्ट का निर्माण और मौजूदा हवाई अड्डों का विस्तार करना चाहिए. नए एयरपोर्ट और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना चाहिए.
वहीं भारत में विकसित देशों की तुलना में टेक्नोलॉजी का स्तर कम है. इससे एयरलाइंस की सुरक्षा में कमी आ सकती है. यात्रियों की सुरक्षा और भी मजबूती करनी चाहिए, इसके लिए नई टेक्नोलॉजी का उपयोग करना चाहिए. एविएशन सुरक्षा में सुधार के लिए सरकार को एयरलाइंस के लिए कड़े सुरक्षा नियमों को लागू करना चाहिए.
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